Saturday, 20 May 2023

पुराणों में वर्णित आश्चर्य क्षेत्र - कलाप ग्राम

 

पुराणों में वर्णित आश्चर्य क्षेत्र - कलाप ग्राम


 

कलापग्राम नामक एक उत्तम एवं रहस्यमयी स्थान का विवरण पुराणों में मिलता है।  ग्रंथो के अनुसार कलापग्राम में चौरासी हजार ब्राह्मण निवास करते थे।  यहाँ सभी वेदाध्ययन से सुशोभित थे तथा तपस्या के मूर्तिमान् स्वरूप थे।  यह ग्राम सौ योजनतक फैला हुआ माना जात है।  केदारक्षेत्र से सौ योजन आगेतक हिमसंयुक्त प्रदेश में यह स्थान है। उसके सौ योजन आगे बालू का समुद्र बताया जाता है।  उसके बाद सौ योजन विस्तारवाला प्रदेश कलापग्राम नामक प्रदेश है।  यह प्रदेश भूमि पर स्वर्ग माना जाता है।

 

स्कंद पुराण के माहेश्वर-कुमारिका खण्ड में कहा गया है कि नारद मुनि कलाप ग्राम आकाश मार्ग से गए थे।  सौ योजन तक फैला हुआ यह ग्राम नाना प्रकार के वृक्षों से छाया प्राप्त करता है।  अग्निहोत्र से उठे हुए धुएँ का प्रवाह वहाँ कभी शान्त नहीं होता है।  कलाप ग्राम वह स्थान है, जहाँ सत्युग के लिए सूर्यवंश, चन्द्र वंश तथा ब्राह्मण वंश का बीज शेष और सुरक्षित है।

 

मार्ग में जाने का मार्ग

कलापग्राम पहुँचने के दो रास्ते हैं –

·       वायु मार्ग और

·       बिल मार्ग।

अन्न और जल का त्याग करके उपवासपूर्वक दक्षिण दिशावर्ती भगवान कार्तिकेयकी आराधना करें।  कार्तिकेयजी जब साधक को पापरहित हुआ मानते हैं तब स्वप्न में प्रकट होकर आदेश देते हैं कि तुम अभीष्ट स्थान की यात्रा करो।  कार्तिकेयजी के स्थान से पश्चिम एक बहुत ही बड़ी गुफा है, वह सात सौ योजन दूरतक गयी हुई है।  कार्तिकेय जी की आज्ञा मिलने के पश्चात् उसी में प्रवेश करके आगे बढ़ना चाहिये।  इस गुफा के भीतर मरकतमणि का एक शिवलिंग है, जो सूर्यके समान प्रकाश करने वाला है।  उस शिवलिंगके आगे अत्यन्त स्वच्छ सुवर्णके रंगकी मिट्टी मिलती है।  वहाँ शिवलिंगको नमस्कार करके तथा उस पीली मिट्टी को हाथ में लेकर स्तम्भ तीर्थ मे आना चाहिए।  वहीं भगवान् कुमार तथा वराहदेवकी आराधना करके आधी रात होने पर कुएँ से जल निकालना चाहिये।  उस जल और मिट्टी से दोनों आँखों में अञ्जन करना चाहिये।  साथ ही सम्पूर्ण शरीरमे उस जल और मिट्टी का उबटन लगाना चाहिये।  उस अञ्जन के प्रभाव से कदाचित् आठ कदम चलनेपर उसे एक  सुन्दर बिल दिखयी देता है।  तदन्तर उस बिलके भीतर से होकर वह यात्रा करे।  वहाँ कारीप नामक बड़े भयंकर कीड़े होते हैं, परंतु वे उस उबटल के प्रभाव से साधक को डँसते नहीं हैं।  उस बिल के भीतर भगवान् सूर्यके समान तेजस्वी सिद्ध पुरुषोंका दर्शन करते हुए साधक आगे बढ़ता है और परम उत्तम कलाप-ग्राम पहुँच जाता है।  वहाँ मनुष्यों की आयु चार हजार वर्षकी बतलायी गयी है।  वहाँ सब लोग फलोंका ही भोजन करते हैं।

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