विभिन्न कालों में सप्तऋषि का स्वरूप
उत्तर के आकाश में सप्तऋषी मण्डल सब से आसानी से पहचाना जा सकता है। इस तारा समूह के सात ऋषि हैं - क्रतु, पुलह, पुलत्स्य, अक्षि अंगिरस, वशिष्ठ, मरीचि। नावियों और यात्रियों के लिए यह दिशासूचक आकाशीय देन है। सप्तऋषि मण्डल के विभिन्न नाम है। आज भी ग्रामीण लोग इसे खटोला या हल कहते हैं। उत्तरी एशिया में यह भालू के रूप में पहचाना जाता है। यूरोप में इसे बिग डिपर/Ursa Major कहते हैं।
फलित ज्योतिष से बाहर जाकर कल्पना करते हैं। 5000 हजार साल के अंतरालों में सप्तऋषि के स्वरूप आगे दिए चित्रों के जैसे होते हैं।
10000 साल पहले सप्तऋषि ऐसे दिखते होंगे ।
5000 साल पहले सप्तऋषि ऐसे दिखते होंगे।
आज सप्तऋषि कुछ ऐसे दिखते हैं।
5000 साल बाद सप्तऋषि कुछ ऐसे दिखेंगे
Concept Imaginations and Graph by Shashi Kant Mishra.