Saturday, 25 July 2020

OOPART - मानव यात्रा के अनसुलझे रहस्य


OOPART - मानव यात्रा के अनसुलझे रहस्य

 प्रस्तुकर्ता - शशिकान्त मिश्र


पृथ्वी पर मानव जाति उत्पत्ति अथवा उद्भव एक रहस्य है।  आज भी यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि मानव जाती का पृथ्वी पर विकास (evolution)  हुआ या यह जाति किसी अन्य ग्रह से पृथ्वी पर आई है। 
 
पृथ्वी पर मानव जाती कब से है, यह दूसरा रहस्य है।   आधुनिक वैज्ञानिक मान्यता है कि संभवतः आदिम मानव (homo-sapiens) का विकास 2.5 अरब वर्ष (2.5 x 109 वर्ष) पहले हुआ है।  और लगभग इतने ही वर्ष लगे आधुनिक सभ्यता के विकास में।  तो क्या आदि काल का मानव असभ्य और अज्ञानी था?
 
इस विषय पर धार्मिक मान्यताओं को आधुनिक-विचारधारा ने स्वीकार नहीं किया।  आधुनिक मान्यताओं पर भी प्रश्नचिन्ह लग जाता है जब सैंकड़ों वर्षों पुरानी वस्तुएँ पृथ्वी के गर्भ से निकलती हैं।  ऐसी वस्तुओं को Out of Place Artifacts (OOPART) कहा जाता है।  उदाहरण के लिए कुछ चित्र यहाँ हैं  –
 
(क)  मिस्र के 5000 वर्ष पुराने स्मारकों पर आधुनिक उपकरणों के चित्रों का मिलना।
 
 
(ख) एंटीकायथेरा मकैनिज़्म एक खगोलीय यंत्र है जिसमें गीयर्स का इस्तमाल हुआ है।  यह यंत्र 2000 वर्ष पुराना है जब की गीयर्स का आविष्कार केवल 1000 वर्ष पूर्व ही होने का अनुमान है।
 

(ग) रुस में यूरल पर्वतों के नज़दीक नारदा नदी के तट पर अनेकों स्क्रू, स्प्रिंग आदि जैसी टंग्सटन, मौलीबीडियम, ताँबे आदि धातु से बनी 20,000 वर्ष पुरानी चीजें मिली हैं। यह 1 सेंमी से 0.003 मि.मी. लंबाई की हैं। 
 
 
(घ) वर्जीनिया के कोयले की खदानों में तीस करोड़ (30,00,00,000 वर्ष) पुरानी कोयले की खदानों में कई सौ मीटर नीचे पीतल की घंटी का मिलना।
 
 
ऐसे अनेकों उदाहरण है जो आधुनिक वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित कर रहीं हैं।  इन वस्तुओं का अस्तित्व आधुनिक मानव-विकास संबंधी सिद्धांतों के पूर्णता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।  इससे सिद्ध होता है कि मानव के पृथ्वी पर उत्पत्ति एवं सभ्यता के विकास का ज्ञान अधूरा है।  परंतु यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन एवं आधुनिक सभ्यता के बीच हम एक बहुत बड़ी कड़ी को खो चुके हैं।
 
तीसरी अनसुलझी पहेली है - ब्रह्माण्ड की उत्पत्ती कब, कहाँ, कैसे और क्यों हुई।  आधुनिक मान्यता है कि ब्रह्माण्ड की शुरुआत  करीब 1 से 2 अरब वर्ष ( 2 x 109वर्ष) पूर्व हुई थी।  ब्रह्माण्ड की शुरुआत कैसे हुई? इसके लिए ज्यादातर वैज्ञानिकों ने ‘बिग बैंग थ्योरी’ को अपनाया है।  वैज्ञानिक यह भी स्वीकारते हैं कि इनका कोई प्रमाण नहीं है।  अर्थात् यह गणना और सिद्धांत केवल अंदाज़मात्र है। 
 

 


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