नाग पञ्चमी व्रत
शुभ योग – 25 जुलाई 2020, श्रावण शुक्ल ५ शनिवार (१२:०२ बजे तक), अमृतयोग,
त्रिपुष्कर योग
यह व्रत श्रावण शुक्ल
पञ्चमी (षष्ठी युक्त) तिथि को करते हैं।
क्या करें इस दिन –
इस दिन सर्पों को
दूध से स्नान और पूजन कर दूध पिलाया जाता
है। आजकल सर्प का पकड़ना निषेध है, अतः किसी
मंदिर में नागदेवता की मूर्ति पर यह कार्य करें।
अपने घर के दरवाजे को
दोनो तरफ गोबर के सर्प को बनाकर उनका दही, दूर्वा (दूब/हरी घास), कुशा, गंध, अक्षत,
पुष्प, मोदक और मालपुआ आदि से पूजन करें।
ब्राह्मणों को भोजन
करवा कर एकभुक्त (दिन में एक बार ही भजन कर) व्रत करें।
मंत्र – “ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा” का जप करने से भय और सर्पविष
दूर होता है।
स्तोत्र –
अनंतं वासुकि शेष पद्मनाभं च कम्बलम्।
शड्खपाल धार्तराष्ट्र तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।।
तस्मे विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीं भवेत्।
सर्प की विशेषता
सर्प एक स्वच्छ और
निर्मल हृदय प्राणी होता है। सर्प शंकर जी
का श्रृङ्गार है। सर्प की पूजा की जाती है।
सर्प सदैव निर्दोष होता है।
इस पर एक संत का
अनुभव प्रस्तुत करना चाहूँगा। संत स्वामी
राम ने अपने अनुभव एक पुस्तक में संकलित किए हैं।
पुस्तक का नाम – “लिविंग
विद हिमालयन मास्टर्स”
एक दिन हिमालय के संत शिक्षण काल में अपने गुरु के साथ नित्य हवन पूजन आदि के
लिए सूखी लकड़ियाँ बिनने जंगल जाते हैं।
जंगल में स्वामी राम एक सूखे पत्तों का ढेर उठाते हैं जिसमें एक काली नागिन
छिपी बैठी रहती हैं। यह देखते हि गुरु देव
तुरंत सचेत करते हुए कहते हैं कि राम अपने को संभालो। बिलकुल भी मत डरना अन्यथा वह नागिन काट
लेगी। अपने डर को वश में करते हुए स्वामी
राम उसे जमीन पर छोड़ देते हैं।
बाद में गुरु देव समझाते हैं कि भयावह जीवों को देख कर मानव भयभीत हो जाता है
तथा बचाव की भावना जगा लेता है। इसे नाग
एवं अन्य जानवर भांप लेते हैं तथा आक्रमण का आभास करते हैं। इसलिए वे मानव पर घात करते हैं। अन्यथा वे किसी पर व्यर्थ आक्रमण नहीं करते।
यही उनकी प्रकृति का नियम है।
साँप विशेष रूप से शुद्ध जानवर है। वह
कीचड़ से भी निकल कर आता है तो उसका शरीर वैसे ही चमकता है जैसे कुछ हुआ ही
नहीं। यही एक जीव है जो अपनी अशुद्ध चमड़ी
को समय समय पर बदलने का कष्ट उठाता है।
ऐसे ही अनेक गुण साँप के होते हैं।
अतः जब तक हमारा मन
कमजोर रहता है तब तक ही कालसर्प जैसे दोष हमें डरा सकते हैं, अन्यथा नहीं।
सर्प पृथ्वी के आहार-श्रंखला का एक
महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपरोक्ष रूप में यह मानव को लाभ पहुँचाता है।

Informative article....
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