Monday, 27 July 2020

भविष्यवाणियाँ जो सत्य हुईं


भविष्यवाणियाँ जो सत्य हुईं

 

कलियुग के प्रभाव तथा कल्कि-अवतार के विषय में लगभग हर भारतीय जानता है।  पुराणों में अनेकों भविष्यवाणियाँ हैं।  सनातनी ग्रंथों के प्रति लोगों में अविश्वास बढ़ाने के षड्यंत्र के चलते इन भविष्यवाणियों पर विश्वास नहीं किया जाता है।  भविष्यवाणियाँ महज मनगढ़ंत समझी जाती हैं।  पर विश्व के हर समुदाय में भविष्यवाणियों का विशिष्ठ स्थान है।  ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जहाँ हम पाते हैं कि भविष्यवाणियाँ सत्य हुईं है।  अगर अन्य भविष्यवाणियाँ सत्य होती हैं तो हम पुराणों में दी हुई भविष्यवाणियों को भी क्यो न सही माने और उन पर विश्वास करें।

 

चलिए कुछ भविष्यवाणियाँ जो सत्य हुई उनपर विचार किया जाए।

 

1.     मिशैल डी नास्त्रेदमस - सही भविष्यवाणियों पर पुराणों से अलग मैने पहली पुस्तक नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ” 1990 में पढ़ी थी। नास्त्रेदमस का जन्म 14 या 21 दिसम्बर 1503 को फ्रांस (in Saint-Rémy-de-Provence, Provence) में हुआ था।  दवा के कारोबार से जीवन आरंभ कर 1550 नास्त्रेदमस तंत्र और ज्योतिष में कार्य करने लगे।  इनका पंचांग और वर्ष फल बहुत प्रचलित हुआ।   जानकारी के अनुसार इन्हों ने कुल 6,338 भविष्यवाणियाँ लिखी हैं।  धार्मिक अवरोध से बचने के लिए भविष्यवाणियाँ प्रायः सांकेतिक भाषा में लिखी गई थी जिन्हे क्वाट्रेनस कहा जाता है।  इंगलैण्ड के हैनरी सी. रॉबर्ट द्वारा लिखी गई पुस्तक द कम्प्लीट प्रौफेसीज़ आफ नास्त्रेदमस 1947 में प्रकाशित सबसे प्रचलित अनुवाद है। 05 सितम्बर 1666 की लंदन शहर की आग की दुर्धटना, 1799 की फ्रांस-क्रांती, नेपोलियन का उदय, हिटलर तथा दो विश्वयुद्ध, हिरोशिमा-नागासाकी, जॉर्ज कैनेडी की हत्या, लेडी डायना की मृत्यु, वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर आतंकी हमला आदि प्रमुख भविष्यवाणियाँ सत्य हुईं।

 

2.     11 सितम्बर 2001 के अमेरिका पर आंतकी हमले का पूर्वाभास कई लोगों को हुआ था।  घटना के वजह से हुई एक विधवा अपनी पुस्तक में लिखती है कि 11 सितम्बर के पहले से ही उसके पति को लगने लगा था कि वह 2001 से आगे जीवित नहीं रहेगा।  घटना के पहले पति ने सारे परिवार के साथ समय बिताया और घटना की जानकारी दी थी।  घटना वाले दिन उसे सुबह से चक्कर आने लगे थे।


3.     1898 में द रैक आफ द टीईटेनलेखक मौर्गन रॉबर्टसन की पुस्तक में एक पानी के बड़े जहाज के समुद्र में डूबने का उल्लेख मिलता है।  कहानी में उल्लिखित घटना बिलकुल वैसी थी जैसे 15 अप्रैल1912 में टाईटेनिक जहाज के डूबने की थी। 


4.     अब्राहम लिंकन को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास होगया था।  इसका जिक्र उन्हो नें अपने अंगरक्षक से किया था।  उन्हों ने अपने सपने में खुद को ह्वाईट हाउस की तरफ पैदल चलते हुऐ देखा था।  रास्ते में कुछ लोग आँसू बहा रहे थे....आगे एक मृत शरीर को घेरे खड़े थे।  सपने में लिंकन एक सिपाही से पूछते हैं कि वह मृत कौन है तो सिपाही बतलाता है कि वह अमेरिका के राष्टपति हैं जिनकी अभी ही हत्या कर दी गई है।

 

5.     1913 में एच.जी. ह्वेल्स ने द वर्ल्ड सैट फ्री नामक उपन्यास में एटमी बम का जिक्र किया था।  तब चेन रिएक्शन जैसे सिद्धान्त वैज्ञानिक नहीं जानते थे।  परंतु 32 वर्ष बाद हिरोशिमा नागासाकी पर एटमी बम का प्रयोग हुआ।

 

6.     1735 में जॉनाथन स्विफ्ट की गुलिवर की यात्राएँ नामक पुस्तक में मंगल ग्रह के दो चन्द्रमाओं का जिक्र है। जब की 142 वर्ष बाद 1877 में ही इन उपग्रहों की खोज हुई।

 

7.     1865 में जूल वर्ने ने अपनी पुस्तक फ्रॉम अर्थ टू मून में कल्पना की  थी कि एक रॉकेट फ्लोरिडा से उड़ेगा।  यह रॉकेट एक यंत्र लेकर जाएगा जो चन्द्रमा पर उतरकर वापस पृथ्वी पर लौटेगा।  104 वर्ष बाद ठीक ऐसा ही अपोलो-11 मिशन में हुआ।

 

8.     1870 में जूल वर्ने ने विद्युत संचलित पण्डुबी का जिक्र अपनी एक पूस्तक 2000 लीग्स अण्डर द सी में किया था।  इसमें कैप्टन नीमो अपनी नॉटिलस नामक पण्डुबी पर रहता है।  90 वर्ष बाद अमेरिका ने पहली विद्युत शक्ति से चलने वाली यूएसएस नॉटिलस बनाया।

 

9.     पोलैण्ड के जैन गॉट्लिब ब्लौच ने यूरोपीय युद्धों का विश्लेषण किया था।  1898 में अपनी एक पुस्तक में आधुनिक युद्ध के विभत्स रूप का चित्रण किया था।  उनके कथनानुसार 16 वर्ष बाद पहला विश्वयुद्ध घटित हुआ।

 

10.भारत से लौटते वक्त 325 ईसा पूर्व में  सिकंदर अपने साथ कालानौस (ग्रीक नाम) नामक हिन्दू साधु को साथ ले जा रहा था।  साधु रास्ते की परेशानियों की वजह से सिंकदर से मृत्यु की इच्छा प्रस्तुत करता है।  साधु को मार दिया जाता है।  परंतु मरने से पूर्व साधु कहता है कि वह फिर सिकंदर से बैबिलोनिया में मिलेगा।  इस समय तक सिंकदर का बैबिलोनिया जाने का कोई विचार नहीं था।  पर... 32 वर्ष का सिकंदर बैबिलोनिया में जा कर मृत्यु को प्राप्त हुआ।  शायद साधु से मरकर मिला हो।

 

11. पुर्तगाल के फातिमा शहर की तीन चरवाहा लड़कियाँ काफी प्रसिद्ध हैं।  इन लड़कियों को प्रथम विश्वयुद्ध के बाद एक दिव्य महिला ने प्रकट हो कर कहा था कि एक विशाल चिह्न रात्री में उत्पन्न होगा जो दूसरे विश्व युद्ध का संकेत होगा।  25 जनवरी 1938 को एक बेहद विशाल प्रकाशपुंज (AURORA) यूरोप में देखा गया।  यह इतना बड़ा था कि इसका प्रकाश अमेरिका और अफ्रीका में भी देखा जा सका था।  इसके छः हफ्ते बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध का आरंभ होने लगा।

 

12.इज़राईल इंस्टूट्यूट आफ टेक्नोलाजी के वैज्ञानिकों नें 2012 में हुई क्यूबा में घटित कॉलरा-महामारी की भविष्यवाणी की थी।  यह अनेको घटनाओं के संकलन तथा उससे निकाले हुऐ निष्कर्ष पर आधारित भविष्यवाणी थी, जो सत्य हुई।  प्रशासन के लिए यह बेहद विस्मयकारी घटना है।

 

13.इन्डोनेशिया के राजा जयबाला ने भविष्यवाणी की थी कि गोरे लोग तीनसौ वर्ष तक इण्डोनेशिया पर शासन करेंगें।  यह शासन एशियाई साम्राज्य द्वारा समाप्त होगा। परंतु यह शासन काल बहुत लघु काल का होगा।  भविष्य वाणी के 900 वर्ष बाद 1600 में निदर्लैण्ड का सामराज्य आरंभ हुआ जो 1942 में जापानियों द्वारा समाप्त किया गया।  वहाँ के लोग आपने राजा की भविष्यवाणी पर विश्वास करते थे तथा बहुत प्रसन्न हुए।  तीन साल बाद अमेरिका के सामने जापान ने आत्मसमर्पण किया।  इसके बाद इण्डोनेशिया पूर्णरूप से स्वतंत्र हुआ। 


आज हम लोग तोते की भविष्यवाणी, ऑक्टोपस की भविष्यवाणी, इन्टरनेट की भविष्यवाणी, मूर्गा भविष्यवाणी, सील की भविष्यवाणी आदि पर विश्वास और चर्चा करने में गर्व महसूस करते हैं।  पर पौराणिक या धार्मिक भविष्यवाणियाँ दकियानूसी लगती हैं। 

 


2 comments:

  1. Jab nature se taar judte hain to sahi byavishyawaninikalti hain....pauranik aur dharmik bhavishyawani humare jeevan main bahut mahtv rakhti hain ...usse takiyanusi nahi kh sakte ....humare samne itne examples hain....

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  2. जी, हमारे प्राचीन ग्रंथ बहुत मह्त्वपूर्ण सूचना के भण्डार है। उनका लाभ लेना चाहिए।

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